इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: अब पूरे भारत में किसी भी नोटरी से सत्यापित शपथ पत्र मान्य, फोटो खिंचवाने की बाध्यता समाप्त
प्रयागराज: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक अंतरिम आदेश में न्याय तक पहुँचने की प्रक्रिया को सरल बनाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है।
अब पूरे भारतवर्ष में किसी भी अधिकृत नोटरी पब्लिक के समक्ष सत्यापित शपथ पत्र को मान्य माना जाएगा। साथ ही, बार एसोसिएशनों द्वारा वादियों से फोटो पहचान के लिए वसूले जाने वाले 500 रुपये के शुल्क पर भी रोक लगा दी गई है।
कोर्ट ने कहा कि “जब न्यायिक उपचार का लाभ उठाने का अधिकार एक संवैधानिक अधिकार बन जाता है, तो उसके रास्ते में कोई भी अवांछित बाधा नहीं होनी चाहिए। अन्यथा, यह न्याय पाने का रास्ता कमज़ोर हो जाएगा।”
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्याय प्राप्ति की राह में प्रक्रियात्मक जटिलताओं को दूर करना आवश्यक है ताकि संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार केवल काग़ज़ों तक सीमित न रह जाए।इसके साथ ही, स्टाम्प रिपोर्टिंग अनुभाग को निर्देशित किया गया है कि वे उन याचिकाओं पर आपत्ति न उठाएं जो किसी नोटरी पब्लिक के समक्ष शपथ पत्र द्वारा समर्थित हैं।
इस आदेश से अब वादियों को कोर्ट परिसर में अतिरिक्त शुल्क देकर फोटो खिंचवाने की आवश्यकता नहीं होंगी






