राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित प्रो. सुधाकर दीक्षित को ऑब्जर्वर पीस फाउंडेशन का सर्वोच्च सम्मान

वाराणसी, दो अक्तूबर ऑब्जर्वर पीस फाउंडेशन ने आज इस वर्ष के अपने प्रतिष्ठित ‘ऑब्जर्वर आउटस्टैंडिंग पीपल ऑफ द 21st सेंचुरी अवार्ड’ से राष्ट्रपति पुरस्कार से वर्ष 2016 में सम्मानित न्याय मीमांसा एवं वेदान्त के प्रकांड पंडित प्रो. सुधाकर दीक्षित को सम्मानित किया। प्रो. सुधाकर दीक्षित को यह सम्मान भारतीय दर्शन, वेदांत और न्याय मीमांसा के क्षेत्र में उनके दीर्घकालीन एवं उल्लेखनीय योगदान तथा जीवनभर की अकादमिक साधना के लिए आज यहां एक भव्य कार्यक्रम में प्रदान किया गया। सम्मान प्रदान करते हुए ऑब्जर्वर पीस फाउंडेशन के अध्यक्ष डा. अमर बहादुर सिंह ने बताया कि प्रो. दीक्षित भारतीय ज्ञान परंपरा और मनीषा के महत्वपूर्ण संवाहक हैं। गीता एवं वेदांत के विद्वान के रूप में उनकी विद्वत्ता और शास्त्रों के प्रति समर्पित जीवन ने उन्हें विशिष्ट पहचान प्रदान की है।डा. सिंह ने कहा कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति अपने दायित्वों का निर्वहन करता है, लेकिन जो लोग अपने गहन चिंतन, निस्वार्थ सेवा और उत्कृष्ट कार्यों के माध्यम से समाज को नई दिशा और आयाम प्रदान करते हैं, वे विशिष्ट होते हैं। ऑब्जर्वर पीस फाउंडेशन ऐसे ही असाधारण व्यक्तित्वों की पहचान कर उन्हें सम्मानित करने का कार्य पिछले 25 वर्षों से करता आ रहा है।उन्होंने बताया कि फाउंडेशन द्वारा शिक्षाविदों, चिकित्सकों, अधिवक्ताओं, पत्रकारों, प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों तथा समाजसेवियों को उनके योगदान के लिए समय-समय पर सम्मानित किया जाता रहा है। करपात्र रत्न से विभूषित ‘महामहोपाध्याय प्रोफेसर सुधाकर दीक्षित न्याय वैशेषिक दर्शन के प्रकांड विद्वान हैं। मूलतः उत्तर प्रदेश के मउनाथभंजन जिले में घोसी के हड़हुआ गांव के निवासी प्रोफेसर सुधाकर दीक्षित का कर्मक्षेत्र वाराणसी रहा है। वर्तमान में वह झारखंड की राजधानी रांची में वेद-वेदांत, दर्शन तथा धर्मशास्त्र का अध्यापन एवं प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। प्रोफेसर दीक्षित गीता, भारतीय दर्शन एवं आध्यात्म से जुड़े क्षेत्रों में न्याय वैशेषिक दर्शन के लब्धप्रतिष्ठ विद्वान के रूप में जाने जाते हैं और यही इनके अध्ययन एवं अध्यापन का मुख्य विषय रहा है। व्याकरण, धर्मशास्त्र, मीमांसा एवं वेदान्त का अध्यापन करने के साथ ही प्रोफेसर दीक्षित अच्छे वक्ता एवं उत्तम कोटि के लेखक के रूप में विख्यात हैं। इनके लेखन का क्षेत्र मुख्य रूप से धर्म, संस्कृति, दर्शन तथा भारतीय राजनीति रही है।भागवत दर्शन एवं गीता के विद्वान प्रोफेसर दीक्षित ने पिछले अनेक दशकों से भागवत एवं गीता के गूढ़ रहस्यों पर महामना मालवीय मिशन, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय थियोसाफिकल सोसाइटी वाराणसी श्रीलालबहादुर शास्त्री केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय दिल्ली पूना विश्वविद्यालय आदि में व्याख्यान एवं प्रवचन दिये हैं। गीता पर उनकी व्याख्या एवं उनके प्रवचन पर आधारित एक विस्तृत ग्रंथ शीघ्र ही प्रकाशित होने वाला है।छात्र जीवन से अब तक अनेक पुरस्कार हासिल कर चुके प्रोफेसर दीक्षित ने परमपूज्य सन्त स्वामी करपात्री जी द्वारा लिखे गये ‘वेदस्वरूप और प्रामाण्य’, ‘वर्णाश्रम संस्कृति’ आदि ग्रंथों का संपादन किया है।प्रतिष्ठित शोध पत्रिका ‘जिज्ञासा’ के प्रमुख सलाहकार श्री दीक्षित मीडिया के क्षेत्र में सुधार एवं परिष्कार के लिए स्थापित ‘क्लीन मीडिया फाउंडेशन’ के संरक्षक एवं अध्यक्ष भी हैं।गीता प्रेस से प्रकाशित अनेक पुराणों के हिन्दी अनुवाद प्रोफेसर दीक्षित के निर्देशन में ही संपन्न हुए हैं। विभिन्न शीर्ष शोध पत्रिकाओं में प्रोफेसर दीक्षित के दो सौ से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हुए हैं।दीक्षित जी अनेक वर्षों तक स्वामी करपात्री जी द्वारा प्रारंभ की गयी प्रसिद्ध पत्रिका ‘सिद्धान्त’ के संपादक भी रहे हैं।अखिल भारतीय सर्ववेद शाखा सम्मेलन में साठ के दशक में ही प्रोफेसर सुधाकर दीक्षित को स्वामी करपात्री जी की उपस्थिति में ‘वाद रत्नाकर’ की उपाधि शारदापीठ के तत्कालीन शंकराचार्य अभिनव सच्चिदानंद तीर्थ जी ने प्रदान की थी। वर्ष 2014 में उन्हें झारखंड के मुख्यमंत्री ने ‘महानायक’ सम्मान से सम्मानित किया जबकि इसी वर्ष स्वामी करपात्री जी के द्वारा स्थापित काशी स्थित ‘श्री धर्मसंघ शिक्षा मंडल’ ने देश के सर्वोच्च विद्वान को दिये जाने वाले एक लाख रुपये के करपात्र रत्न सम्मान से भी उन्हें विभूषित किया। इसके अलावा उन्हें द्वारकापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी ने ‘महामहोपाध्याय’ की उपाधि से अलंकृत किया है। पूर्व में उन्हें ‘न्यायरत्न’, ‘विद्याश्री’ और ‘करपात्र स्वामी’ पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं।शिक्षा मंत्रालय प्रोफेसर दीक्षित जी को 1964 से 1966 तक लगातार तीन वर्ष तक न्याय, मीमांसा और वेदांत विषयों में अखिल भारतीय शास्त्रीय वाद-विवाद प्रतियोगिता में नौ स्वर्ण पदक प्रदान कर चुका है।







