वाराणसी के नाविकों की बदली किस्मत: 2014 के बाद हुआ आमदनी में क्रांतिकारी परिवर्तन, आज हर दिन देव दीपावली जैसा जश्न
29 जुलाई 2025 | रिपोर्टर: विशेष संवाददाता, वाराणसी विशेष किनारे बसे सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक नगरी वाराणसी में एक तबका ऐसा भी है जिसकी जिंदगी में वर्ष 2014 के बाद क्रांतिकारी बदलाव आया है।
हम बात कर रहे हैं गंगा घाटों पर नाव चलाने वाले मल्लाहों और मछुआरों की, जिनकी वर्षों की उपेक्षा और गरीबी की कहानी अब बदलाव और सम्मान में बदल चुकी है।इस संदर्भ में क्षेत्रीय संयोजक (मछुआरा प्रकोष्ठ) वीरेंद्र निषाद जी से एक विशेष बातचीत हुई, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे 2014 से पहले नाविक समुदाय गरीबी और संघर्ष से जूझता था, जबकि आज वे आत्मनिर्भर और सम्मानित जीवन जी रहे हैं।—
2014 से पहले की स्थिति: संघर्ष और अभाववीरेंद्र निषाद बताते हैं कि 2014 से पहले नाविकों की स्थिति अत्यंत दयनीय थी।अधिकांश नाविक दूसरों की नाव किराए पर चलाते थे।उनकी दैनिक आय मात्र ₹100 से ₹300 के बीच होती थी।कोई सरकारी योजना या सामाजिक सुरक्षा नहीं थी, जिससे उनका जीवन अत्यंत कठिन था।त्योहारों जैसे देव दीपावली जैसे अवसरों पर ही थोड़ी अतिरिक्त आमदनी होती थी।“मल्लाह समाज के बारे में न तो कोई सोचता था, न ही उनके जीवन में कोई विकास दिखता था,” निषाद जी कहते हैं।

2014 के बाद बदलाव की शुरुआत: मोदी और योगी सरकारों का विशेष ध्यानवर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी से सांसद बनने के बाद नाविकों के जीवन में बदलाव की नई धारा बहने लगी।टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए अनेक योजनाएं शुरू की गईं।गंगा घाटों का सुंदरीकरण, क्रूज सेवाएं, रिवर फ्रंट डेवेलपमेंट जैसे कार्यों से स्थानीय नाविकों को रोजगार के अवसर मिले।सरकार ने मल्लाहों को स्वरोजगार हेतु प्रोत्साहित किया और लोन, नाव खरीदने की सुविधा एवं ट्रेनिंग प्रदान की।वीरेंद्र निषाद बताते हैं कि आज वही नाविक जो कभी दूसरों की नाव पर काम करते थे, अब खुद नावों के मालिक हैं और दैनिक ₹2500 से ₹5000 तक की कमाई कर रहे हैं।-
अब हर दिन है ‘देव दीपावली’ जैसाकभी जो कमाई साल में एक बार देव दीपावली जैसे पर्व पर होती थी, आज वह आम दिनों में हो रही है।वीरेंद्र निषाद कहते हैं, “मोदी जी के प्रयासों से अब हमारे लिए हर दिन बनारस में देव दीपावली जैसा होता है।”घाटों पर आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है।हर नाविक अब अपने व्यवसाय का मालिक बन चुका है और परिवार का भरण-पोषण सम्मानपूर्वक कर रहा है।-
महाकुंभ ने दिया नाविकों को आर्थिक समृद्धि का वरदान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा आयोजित हालिया महाकुंभ के दौरान नाविकों को अभूतपूर्व लाभ मिला।बड़े घाटों जैसे अस्सी घाट, दशाश्वमेध घाट, सुमेर घाट पर नाव मालिकों ने 25 लाख से 35 लाख तक की कमाई की।कुछ नाव मालिकों ने दावा किया है कि उनकी कुल कमाई ₹80 लाख से ₹90 लाख तक पहुँची है।नावों की मांग इतनी अधिक थी कि नविकों को बुकिंग रोकनी पड़ी।
वीरेंद्र निषाद कहते हैं, “महाकुंभ ने हमारे जीवन को नई दिशा दी। हमारे जैसे मछुआरे भी अब अपने बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ा पा रहे हैं।”-
प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी को आभार वीरेंद्र निषाद ने समस्त मल्लाह और मछुआरा समाज की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हृदय से आभार प्रकट किया।उन्होंने कहा, “पहले जो समाज हाशिए पर था, आज उसी समाज को केंद्र में लाकर उन्हें आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन दिया गया है।”-
: बदलाव की यह धारा थमने वाली नहीं वाराणसी के घाटों से जो बदलाव की गूंज उठी है, वह समूचे देश के नाविक समुदाय के लिए प्रेरणा बन गई है।जहां पहले अभाव, अपमान और संघर्ष था, अब वहां है आत्मविश्वास, अवसर और उन्नति।प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए “सबका साथ, सबका विकास” के नारे को वाराणसी के नाविकों ने साक्षात् जीकर दिखा दिया है।–






