साथियों के हक की लड़ाई में जीवन समर्पित करने वाले डॉ. इंदुकांत दीक्षित को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड
गया, बिहार। कर्मचारियों के अधिकार, सम्मान और न्याय की लड़ाई को अपना जीवन समर्पित करने वाले प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) के कर्नाटक ब्यूरो हेड डॉ. इंदुकांत दीक्षित को उनके दीर्घकालीन संघर्ष, प्रतिबद्धता और कर्मचारी हितों में उल्लेखनीय योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
यह सम्मान उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा प्रदान किया गया।यह सम्मान नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ न्यूजपेपर एंड न्यूज एजेंसी एम्प्लाइज ऑर्गेनाइजेशन तथा फेडरेशन ऑफ PTI की ओर से गया, बिहार में आयोजित तीन दिवसीय 46वीं संगोष्ठी के दौरान प्रदान किया गया।
संगोष्ठी का आयोजन 19, 20 और 21 सितंबर 2026 को किया गया, जिसमें देशभर से प्रेस एवं न्यूज एजेंसियों से जुड़े कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
डॉ. इंदुकांत दीक्षित पिछले करीब 25 वर्षों से PTI से जुड़े हुए हैं। पत्रकारिता के साथ-साथ उन्होंने अपने सहकर्मियों और कर्मचारियों के अधिकारों की लड़ाई को भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाया। कर्मचारियों के कथित उत्पीड़न और उनके अधिकारों से जुड़े मामलों में उन्होंने प्रबंधन के खिलाफ आवाज बुलंद की और न्याय की लड़ाई को सड़क से लेकर अदालत तक पहुंचाया।
कर्मचारी हितों के लिए लगातार आवाज उठाने का उन्हें व्यक्तिगत स्तर पर भी नुकसान उठाना पड़ा। संगठन से जुड़े लोगों के अनुसार, उनके कई प्रमोशन रोके गए और उनका विभिन्न स्थानों पर स्थानांतरण किया गया। उनका कहना है कि इन परिस्थितियों के बावजूद डॉ. दीक्षित अपने संकल्प से पीछे नहीं हटे और लगातार अपने साथियों के अधिकारों के लिए आवाज उठाते रहे।
डॉ. दीक्षित के संघर्ष की प्रमुख कड़ियों में वर्ष 2018 में PTI से बड़ी संख्या में कर्मचारियों की सेवा समाप्ति से जुड़ा मामला भी शामिल है। कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़े इस मुद्दे को लेकर उन्होंने लगातार कानूनी और संगठनात्मक स्तर पर आवाज उठाई।
इस संघर्ष के चलते उन्हें लंबे समय से अपने परिवार से दूर रहना पड़ रहा है लेकिन उन्होंने अपने साथियों के अधिकारों की लड़ाई से पीछे हटना स्वीकार नहीं किया।
डॉ. इंदुकांत दीक्षित के लिए कर्मचारी हित केवल एक संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि वर्षों से निभाया जा रहा संकल्प रहा है। साथियों के लिए निरंतर आवाज बनकर खड़े रहने के कारण उन्हें विभिन्न कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। स्थानांतरण और अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने संघर्ष का रास्ता नहीं छोड़ा और कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़े मामलों को लगातार उठाते रहे।
साथियों का कहना है कि डॉ. दीक्षित ने अपने व्यक्तिगत हितों की परवाह किए बिना कर्मचारियों के अधिकार और सम्मान को प्राथमिकता दी। वर्षों से जारी उनके संघर्ष, प्रतिबद्धता और कर्मचारी हितों के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें यह प्रतिष्ठित लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड प्रदान किया गया।






