जंसा थाने में घूसखोरी का खुलासा: थानेदार और सिपाही पर भ्रष्टाचार के आरोप साबित
वाराणसी। पुलिस विभाग में घूसखोरी किस हद तक फैल चुकी है, इसका ताजा उदाहरण जंसा थाने से सामने आया है। विवादित ज़मीन पर चारदीवारी बनवाने के लिए थानेदार बैधनाथ सिंह द्वारा 40 हजार रुपये की रिश्वत लेने का मामला प्रकाश में आया है।
पीड़ित नीरज पांडेय ने आरोप लगाया कि थानेदार ने अपने चालक, मुख्य आरक्षी विजय कुमार पांडेय के माध्यम से यह रकम ली। हालांकि, जब चारदीवारी का काम पूरा नहीं हुआ, तो नीरज पांडेय ने थानेदार से अपनी राशि वापस मांगी। इसके बाद थानेदार बैधनाथ सिंह ने 26 हजार रुपये लौटा दिए, लेकिन 14 हजार रुपये यह कहकर रोक लिए कि यह रकम जीएसटी के तौर पर ली गई है।
घूसखोरी के इस मामले को लेकर पीड़ित नीरज पांडेय ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाई, जिसके बाद मामले की जांच अपर पुलिस उपायुक्त, गोमती जोन द्वारा की गई। जांच में पाया गया कि थानेदार बैधनाथ सिंह और चालक विजय कुमार पांडेय पर लगाए गए आरोप सही हैं।
जांच के बाद अपर पुलिस उपायुक्त ने अपनी रिपोर्ट हाई कमान को भेज दी है, और इस मामले में कार्यवाही की सिफारिश की है। यह मामला पुलिस विभाग में फैले भ्रष्टाचार की गंभीरता को उजागर करता है और एक बार फिर पुलिस के निडर घूसखोर अधिकारियों और कर्मचारियों पर सवाल खड़े करता है।
अब देखना यह होगा कि हाई कमान इस मामले में कितनी कड़ी कार्यवाही करता है और ऐसे अधिकारियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।






