बिजली निजीकरण के विरोध में बनारस के बिजली कर्मियों ने भरी हुंकार, मुख्यमंत्री से की हस्तक्षेप की मांग

वाराणसी, 23 मई। पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के विरोध में बनारस के बिजली कर्मियों का आंदोलन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के बैनर तले भिखारीपुर स्थित प्रबंध निदेशक कार्यालय पर आयोजित विरोध सभा में कर्मचारियों ने एक स्वर में ऊर्जा प्रबंधन द्वारा सुझाए गए तीनों निजीकरण विकल्पों को सिरे से खारिज कर दिया।

संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की कि वे इस मुद्दे में प्रभावी हस्तक्षेप करें और निजीकरण की प्रक्रिया को तत्काल निरस्त कराएं। अभियंता संघ के प्रदेश महासचिव ई. जितेंद्र सिंह गुर्जर ने कहा कि बिजली कर्मी उपभोक्ताओं की सेवा में कटिबद्ध हैं और भीषण गर्मी में भी आपूर्ति बाधित न हो, इसका पूरा ध्यान रख रहे हैं।

राज्य विद्युत प्राविधिक कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष सी.बी. उपाध्याय ने कहा कि 2017 में 41% तक पहुंची एटी एंड सी हानियों को बिजली कर्मचारियों ने घटाकर 16.5% तक ला दिया है। इसके बावजूद प्रबंधन झूठे आंकड़ों के आधार पर घाटे का हवाला देते हुए निजीकरण को आगे बढ़ा रहा है।

सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय पदाधिकारी महेंद्र राय ने प्रबंधन पर उत्पीड़नात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्वक ध्यानाकर्षण आंदोलन को हड़ताल बताकर कर्मचारियों को धमकाने और संविदा कर्मियों की छंटनी जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।

जूनियर इंजीनियर संगठन के केंद्रीय पदाधिकारी ई. दीपक गुप्ता ने बताया कि आंदोलन के तहत लगातार तीसरे दिन 2 से 5 बजे तक विरोध प्रदर्शन किया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि टकराव की स्थिति उत्पन्न होने पर पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।सभा की अध्यक्षता संतोष वर्मा और संचालन अंकुर पांडेय ने किया। इस दौरान कई वरिष्ठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी सभा को संबोधित किया और निजीकरण के विरुद्ध एकजुटता दिखाई।