सबसे पहले हम हिन्दुस्तानी हैं एवं हिन्दी से पूरे देश को एक सूत्र में पिरोना है—डा. इन्दुकान्त दीक्षित

मंगलुरु :कर्नाटक: 6 सितंबर 2025 पत्रकार एवं प्रेस ट्रस्ट आफ इंडिया के यहां के प्रभारी डा. इन्दुकान्त दीक्षित ने यहां छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि देश के 146 करोड़ लोगों का एकजुट रहना देश की उन्नति के लिए अत्यावश्यक है और इसके लिए हम सभी को प्रतिज्ञा करनी होगी कि ‘सबसे पहले हम हिन्दुस्तानी हैं’, और उसके बाद ही कन्नडिगा, तेलुगू, तमिल, मलयाली, बांग्ला, बिहारी या पंजाबी हैं।

शनिवार को यहां केनरा विद्यालय के श्री भुवनेन्द्र सभा भवन में हिंदी दिवस कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित करते हुए डा. इन्दुकान्त दीक्षित ने जोर देकर कहा कि सभी 146 करोड़ भारतीयों को एकजुट करने के लिए उन्हें हिन्दी भाषा के एक सूत्र में पिरोना होगा।

उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि न सिर्फ केनरा विद्यालय में बल्कि पूरे मंगलुरु क्षेत्र में लोग या तो हिन्दी समझ लेते हैं अथवा उसे समझने का पूरा प्रयास करते हैं। हिन्दी दिवस कार्यक्रम के महत्व को रेखांकित करते हुए डा. दीक्षित ने कहा कि दक्षिण भारत में चाहे कन्नडिगा लोग हों, ​तमिल, तेलुगू अथवा मलयाली लोग हों उन सबको देश को एकता के एक सूत्र में बांधने के लिए मिलकर हिन्दी को आम लोगों की भाषा बनाना चाहिए जिससे देश के सभी लोग इस भाषाई एकता के सूत्र में बंध जायें और फिर पूरी दुनिया में एक सुर में बात करें।

उन्होंने हिन्दी के प्रसिद्ध कवि भारतेन्दु हरिश्चन्द्र को उद्धृत करते हुए कहा कि भारतेन्दु जी ने अपनी कविता में कहा था, ”निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल, बिन निज भाषा ज्ञान के मिटै न हिय को शूल,”जिसका आशय है कि अपनी मातृ भाषा को यथासंभव अधिकाधिक उपयोग करना चाहिए तथा उसका खूब प्रचार प्रसार भी करना चाहिए अन्यथा हम अपना और अपने समाज का भला नहीं कर सकते हैं

ले​किन इसके साथ ही राष्ट्रीय एकता के लिए हिन्दी को पूरे देश की आम भाषा बनाना भी आवश्यक है। डा. दीक्षित ने स्पष्ट कहा कि जिस प्रकार चीन के 140 करोड़ लोग अपनी भाषा मंदारिन में जब बात करते हैं तो वह पूरी दुनिया में एकजुट ​दीखते हैं ठीक उसी प्रकार अब दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश होने के नाते हमारे 146 करोड़ लोगों को एक ही सुर हिन्दी भाषा में बात—व्यवहार करना चाहिए जिससे दुनिया हमारी ताकत का दीदार कर सके।

उन्होंने लोगों से अपने हिन्दुस्तानी होने पर गर्व करने की बात कही और कहा कि सुप्रसिद्ध हिन्दी कवि माखन लाल चतुर्वेदी की कविता ‘पुष्प की अभिलाषा’ में दिये गये संदेश की भांति सभी भारतीयों को और विशेषकर युवाओं को, छात्रों को देश के लिए अपने तन—मन न्यौछावर करने के लिए सदा तत्पर रहना चाहिए।

मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में हिंदी को राष्ट्र की आत्मा बताते हुए विद्यार्थियों को राज भाषा के संवर्धन के लिए प्रेरित किया। विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती सुरेखा भट ने डा. दीक्षित एवं अन्य अतिथियों का स्वागत किया और विद्यालय के बच्चों के सर्वांगीण विकास की बात की। उन्होंने कहा कि केनरा विद्यालय कर्नाटक के सबसे पुराने एवं अच्छे संस्कार परक विद्यालयों में से एक है।

उन्होंने बताया कि उनके विद्यालय के अधिकतर छात्र हिन्दी भाषा जानते हैं। उन्होंने बताया कि उनके विद्यालय में हिन्दी की विभागाध्यक्ष श्रीमती रजनी के नेतृत्व में बच्चे हिन्दी भाषा के सभी रूपों से सुपरिचित हो रहे हैं और श्रीमती रजनी एवं उनके विभाग की अन्य अध्यापिकाओं का ही प्रभाव है कि विद्यालय के छात्रों का हिन्दी भाषा में बहुत अच्छी पकड़ है। उन सभी का उच्चारण भी बहुत उत्तम है।

आज का आयोजन हर्षोल्लास और गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रार्थना नृत्य से हुआ। मंच संचालन मास्टर प्रज्ञेय ने कुशलतापूर्वक किया। मास्टर अगस्त्य ने मुख्य अतिथि का परिचय दिया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. इन्दुकान्त दीक्षित तथा प्राचार्या श्रीमती सुरेखा भट के अतिरिक्त हिंदी विभागाध्यक्षा रजनी शेणय और वरिष्ठ शिक्षकगण विशेष रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम में मास्टर श्रीहान ने स्वागत भाषण किया इसके अलावा रंगारंग कार्यक्रम में अभिनव ने भावपूर्ण हरिकथा प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया।

इसके बाद विद्यार्थियों ने लघु नाटिका, समूह गान तथा समूह नृत्य प्रस्तुत कर हिंदी भाषा की महत्ता और उसकी सांस्कृतिक गरिमा को रेखांकित किया। पूरे कार्यक्रम को सुरबद्ध कराने में विद्यालय के संगीत के अध्यापक आत्रेय गंगाधर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।अंत में अभिनन्दन कामत ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया।

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