झारखंड में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब, न्यायाधीश की हत्या की जांच एसआईटी करेगी-न्यायालय

रांची, 29 जुलाई झारखंड उच्च न्यायालय ने धनबाद में बुधवार को तड़के आटो से टक्कर मारकर जिला एवं सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद की कथित तौर पर की गयी हत्या पर भारी नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे राज्य की कानून और व्यवस्था की विफलता बताया और कहा है कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब हो गयी है, साथ ही न्यायालय ने न्यायाधीश की मौत की जांच के लिए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के नेतृत्व में विशेष जांच दल के गठन का आदेश दिया और कहा है कि जांच की मॉनीटरिंग स्वयं उच्च न्यायालय करेगा।
झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डा. रविरंजन की अध्यक्षता वाली खंड पीठ ने आज बुधवार को धनबाद में धनबाद के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद की संदिग्ध मौत के मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई की और न्यायाधीश की संदिग्ध मौत पर गहरा दुख एवं निराशा व्यक्त की। न्यायालय ने इस घटना को राज्य की कानून और व्यवस्था की विफलता बताते हुए कहा, ‘‘राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब है।’’
न्यायालय ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए एडीजी संजय लाटकर के नेतृत्व में विशेष जांच दल गठित करने और मामले की तेजी से जांच का राज्य सरकार को आदेश दिया। साथ ही न्यायालय ने कहा कि इस मामले की जांच का वह स्वयं मॉनीटरिंग करेगा।
न्यायालय ने टिप्पणी की, ‘‘राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति बदतर हो गई है, कुछ दिनों पहले पुलिसकर्मी रूपा तिर्की बाद में वकील और अब न्यायाधीश पर हमला किया गया।’’
पीठ ने कहा कि न्यायालय इस मामले की निगरानी करेगा और एसआईटी को समय-समय पर अपनी जांच रिपोर्ट न्यायालय में दाखिल करनी होगी।
न्यायालय ने चेतावनी दी, ‘‘यदि किसी भी समय पीठ को ऐसा प्रतीत हुआ कि जांच सही दिशा में नहीं है तो इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी जाएगी।’’
न्यायालय के निर्देश पर आज मामले की सुनवाई के दौरान राज्य के पुलिस महानिदेशक नीरज सिन्हा एवं धनबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार स्वयं उपस्थित थे।
इससे पूर्व सुनवाई के दौरान पुलिस महानिदेशक नीरज सिन्हा ने न्यायालय को आश्वस्त किया कि वह प्रोफेशनल तरीके से मामले की जांच सुनिश्चित करेंगे और उन्होंने एसआईटी का नेतृत्व करने के लिए राज्य के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक संजय लाटकर का नाम सुझाया। जिस पर न्यायालय ने अपनी सहमति प्रदान कर दी।
न्यायालय इस बात से भी काफी नाराज था कि घटना के बाद एफआईआर दर्ज करने में पुलिस ने देरी की है। न्यायालय ने यहां तक कहा, ‘‘पहले राज्य नक्सलियों के लिए जाना जाता था लेकिन उस दौरान भी किसी न्यायिक अधिकारी पर हमला नहीं हुआ था लेकिन अब जब नक्सलियों का प्रभाव कम हुआ है तो ऐसी घटनाएं पूरे देश में मुद्दा बन गईं।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस घटना के बाद उन्हें देश के विभिन्न कोनों से इस मामले को लेकर प्रतिक्रिया मिली है। उन्होंने कहा, ‘‘स्वयं सर्वाेच्च न्यायालय ने मुद्दे पर मुझ से बातचीत की है इसलिए मुझे भरोसा है कि इस मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी।’’
न्यायालय ने इस दौरान पुलिस उपनिरीक्षकरूएसआईः रूपा तिर्की के मामले को भी उठाया और पुलिस महानिदेशक से पूछा कि अब तक इस मामले में जांच कहां तक पहुंची है? हालांकि यह मामला उच्च न्यायालय के एक अन्य एकल पीठ में चल रहा है, यह सूचित किये जाने के बाद न्यायालय ने कहा कि अब एकल पीठ इस मामले में कोई उचित निर्णय लेगी।
न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिये कि इस मामले में सिर्फ ऑटो चालक व अन्य को ही सजा ना मिले क्योंकि इसके पीछे साजिशकर्ता कोई और है अदालत चाहती है कि पुलिस के हाथ साजिशकर्ता के गिरेबान तक भी पहुंचंे और उसे सजा दिलाई जाय।
पीठ ने धनबाद के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पत्र पर संज्ञान लेते हुए याचिका में बदलाव भी करने के निर्देश दिये।
सुनवाई के दौरान सर्वाेच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह भी दिल्ली से ऑनलाइन उपस्थित हुए और उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को आज उन्होंने भारत के प्रधान न्यायाधीश एनवी रमण के सामने उन्होंने उठाया है वह इस मामले में उच्च न्यायालय की भी पूरी तरह से मदद करेंगे उन्होंने कहा कि इस तरह की घटना न्यायिक व्यवस्था पर हमले की तरह है।
इससे पूर्व विकास सिंह द्वारा इस मामले का उल्लेख करने पर उच्चतम न्यायालय ने आज सुबह कहा कि धनबाद में एक न्यायिक अधिकारी की हत्या से जुड़े मामले का झारखंड के मुख्य न्यायाधीश संज्ञान ले चुके हैं और मामले में संबंधित अधिकारी को पेश होने का निर्देश दिया गया है।
प्रधान न्यायाधीश एन. वी. रमण और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने यह बात उस समय कही जब उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने इस घटना का उल्लेख किया और कहा कि यह न्यायपालिका पर ‘‘बड़ा हमला’’ है।
सिंह ने कहा कि मामले में जांच सीबीआई को दी जानी चाहिए क्योंकि एक गैंगस्टर को जमानत नहीं देने पर न्यायिक अधिकारी की हत्या न्यायिक व्यवस्था पर हमला है।
प्रधान न्यायाधीश रमण ने सिंह से कहा, ‘‘हमें घटना के बारे में पता है और सर्वाेच्च न्यायालय अधिवक्ता संघरूएससीबएः के प्रयासों की हम सराहना करते हैं। मैंने झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से बात की है। उन्होंने मामले का संज्ञान लिया है और अधिकारियों को पेश होने के लिए कहा है। वहां मामला चल रहा है।’’
पीठ ने कहा कि फिलहाल मामले में शीर्ष अदालत का हस्तक्षेप जरूरी नहीं है क्योंकि उच्च न्यायालय मामले का पहले ही संज्ञान ले चुका है।
बुधवार को झारखंड के धनबाद में तड़के सुबह मार्निंग वाक के दौरान धनबाद के जिला एवं सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद की एक आटो के धक्के से संदेहास्पद मौत हो गयी थी। इलाके के सीसीटीवी फुटेज से घटना की पुष्टि हुई।
धनबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार ने बताया कि रास्ते में खून से लथपथ पड़े न्यायाधीश को देखकर वहां से गुजर रहे दूसरे आटो चालक ने उन्हें अस्ताल पहुंचाया था जहां उन्हें चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
उन्होंने बताया कि दुखद पहलू यह था कि न्यायाधीश को अस्पताल ले जाये जाने पर भी किसी ने पहचाना नहीं। बाद में घर वापस न पहुंचने पर जब परिजनों ने मामले की रिपोर्ट पुलिस को की तो पुलिस उनकी तलाश में जुटी। इसी बीच पुलिस को अस्पताल में अज्ञात शव की सूचना मिली जिसकी पहचान कराने पर इस बात की पुष्टि हुई कि वह शव दिवंगत न्यायाधीश उत्तम आनंद का ही था।
उन्होंने बताया था कि न्यायाधीश हजारीबाग के रहने वाले थे।
इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए टक्कर में उपयोग किये गये आटो को बरामद कर लिया है और उसके चालक एवं एक अन्य व्यक्ति को कल देर रात्रि गिरिडीह से गिरफ्तार कर लिया।

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